पुदुचेरी (Puducherry) के एक छोटे से गांव तिरुकन्नूर की एक अलग ही पहचान है। ये गांव अपनी सादगी, हरे-भरे नज़ारों और मिलजुल कर रहने वाले समुदाय के लिए जाना जाता है। यहां के लोग त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों में एक साथ शिरकत करते हैं। शहरों की भागदौड़ से दूर, ये दक्षिण भारतीय गांव अपनी देहाती खूबसूरती और पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने आने वाले सैलानियों को खूब भाता है। लेकिन इस गांव की असली पहचान है यहां की पारंपरिक पेपर माशे क्राफ्ट (Paper Mache Art of Tirukkanur) यानी कागज़ की लुगदी से बनने वाली कलाकृतियां। यहां के कारीगर पिछले करीब 120 सालों से इस हुनर को सीने से लगाए हुए हैं।

पेपर माशे: एक सफ़र जो सदियों पुराना है
तिरुकन्नूर की पेपर माशे कला (Paper Mache Art of Tirukkanur) की जड़ें सदियों पुरानी हैं। कहा जाता है कि ये कला फ्रांसीसियों के ज़रिए पुदुचेरी पहुंची और लगभग 120 साल पहले यहां की मिट्टी में रच-बस गई। साल 2011 में इस कला को Geographical Indication (GI) टैग मिला, जिसके बाद इसकी शोहरत चारों तरफ फैल गई। इस कला की तकनीक बड़ी दिलचस्प है। मोटे कागज़ की लुगदी में चूने के पत्थर, कॉपर सल्फेट और चावल का आटा मिलाया जाता है। इस लेप को मनचाहे साइज़ और डिज़ाइन में ढाला जाता है और फिर चटख़ रंगों से पॉलिश की जाती है। पुराने ज़माने में इमली की गिरी से बना गोंद, कागज़ का पाउडर और चूने का पाउडर भी इन अनोखी कलाकृतियों को बनाने में इस्तेमाल होता था।

रंगों का अपना हिसाब
इस कला की एक ख़ास बात है कि हर आइटम के लिए अलग रग तय है। जैसे धार्मिक रस्मों में काम आने वाली मूर्तियां आमतौर पर नारंगी या गुलाबी रंग में बनाई जाती हैं, वहीं नव-विवाहित जोड़ों की मूर्तियां भी नारंगी या गुलाबी रंग में ही रंगी जाती हैं। पारंपरिक खिलौनों के लिए सफ़ेद, हल्के नीले या क्रीम रंग चुने जाते हैं। कलाकृतियों को भव्य और चमकदार दिखाने के लिए उन पर तरह-तरह के साज़ो-सामान भी जोड़े जाते हैं। तिरुकन्नूर की पेपर माशे कला में महारत हासिल करने के लिए बहुत हुनर और तजुर्बा चाहिए। यूरोपीय परंपराओं से प्रभावित ये आर्ट वक़्त के साथ अपनी एक अलग स्टाइल लेकर डेवलप हुई। अक्सर नक्काशीदार मास्क, सजावटी सामान, मूर्तियों और खिलौनों के रूप में मिलने वाली ये कला पुदुचेरी की शानदार सांस्कृतिक विविधता का जश्न को दिखाती है।

परंपरा की गूंज
तिरुकन्नूर की पेपर माशे कला इलाके की कलात्मक परंपरा और कारीगरी की गवाह है। ये हाथ से बनी चीज़ें न सिर्फ देखने में बेहद खू़बसूरत हैं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बहुत अहम हैं। भारत हो या विदेश, कला के शौक़ीन और कलेक्टर इन्हें बड़े चाव से खरीदते हैं। ये कलाकृतियां यहां के स्थानीय कारीगरों के बेमिसाल हुनर और आर्टिस्टिक अंदाज़ को बयां करती हैं। सालों तक इन कारीगरों ने इस हुनर को तराशा-संवारा है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया है।
कला के खज़ाने की सैर
पुदुचेरी की सैर पर आने वाले हर सैलानी को इन कलात्मक नमूनों को ज़रूर देखना चाहिए। तिरुकन्नूर की पेपर माशे कला एक बेहतरीन सौवेनियर और सजावटी सामान है। इन्हें खरीदते वक़्त कारीगरी,अनोखेपन और सांस्कृतिक महत्व का ध्यान ज़रूर रखें। इन्हें ख़रीद कर आप यहां के कारीगरों और यहां की अर्थव्यवस्था की मदद भी करते हैं।
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