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ट्रंक, चिट्ठियों और तस्वीरों में ज़िंदा है 1947, अमृतसर के Partition Museum की कहानी

1947 में पंजाब का बंटवारा इंसानी तारीख़ के सबसे बड़े और दर्दनाक दौरों में से एक था। इस दौरान लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा। लोगों के उजड़ने, उनके संघर्ष और उस दौर की यादों को संभालकर रखने के लिए अमृतसर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में Partition Museum (पार्टिशन म्यूज़ियम) बनाया गया है। इस म्यूज़ियम को ‘द आर्ट्स एंड कल्चरल हेरिटेज ट्रस्ट’ (TAACHT) ने पंजाब सरकार के ‘पंजाब हेरिटेज एंड टूरिज़्म प्रमोशन बोर्ड’ (PHTPB) के साथ मिलकर तैयार किया है।

ये दुनिया का पहला ऐसा म्यूज़ियम है जो पूरी तरह 1947 के बंटवारे के पीड़ितों और उस दौर से गुज़रने वाले लोगों को समर्पित है। यहां बंटवारे के वक़्त लोगों की ज़िंदगी, उनके घर-बार छूटने का दर्द, उनके संघर्ष और नई जगह पर दोबारा ज़िंदगी शुरू करने की उनकी कहानियों को संभालकर रखा गया है।

Pic Credit: InsideIIM

ऐतिहासिक इमारत और म्यूज़ियम की बनावट

Partition Museum (पार्टिशन म्यूज़ियम) अमृतसर की मशहूर ‘हेरिटेज स्ट्रीट’ के शुरू में मौजूद 19वीं सदी की लाल पत्थरों से बनी अंग्रेज़ी इमारत टाउन हॉल में बनाया गया है। Partition Museum (पार्टिशन म्यूज़ियम) में टोटल 14 गैलरियां हैं, जिन्हें बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया है। इन गैलरियों के ज़रिए लोगों को आज़ादी की लड़ाई के दौर से लेकर 1947 के बंटवारे तक की पूरी कहानी समझने का मौक़ा मिलता है।

यहां बताया गया है कि किस तरह बंटवारे के लिए सरहदें तय की गई, कैसे दोनों तरफ़ से लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर जाना पड़ा और किस तरह उन्होंने नई जगह पर पहुंचकर दोबारा अपनी ज़िंदगी शुरू की। हर गैलरी बंटवारे के एक अलग पहलू और उस दौर से गुज़रने वाले लोगों के दर्द, मुश्किलों और हौसले की कहानी सामने रखती है।

Pic Credit: The National News

गैलरियों में रखी अनमोल चीज़ें

Partition Museum (पार्टिशन म्यूज़ियम) की सबसे ख़ास बात यहां रखी गई वो असली चीज़ें हैं, जिन्हें उन लोगों ने म्यूज़ियम को दिया था, जो 1947 के बंटवारे के वक़्त अपना घर-बार छोड़कर आए थे। यहां पुराने ट्रंक, जेब की घड़ियां, घर के बर्तन, तस्वीरें, कपड़े, चिट्ठियां और ऐसी कई निजी चीज़ें रखी गई हैं, जिन्हें लोग अपने साथ लेकर आए थे। ये चीज़ें सिर्फ़ पुरानी चीज़ें नहीं हैं, बल्कि उन लाखों परिवारों के जज़्बात, दर्द और उनकी आंखों देखी कहानी की गवाह हैं, जिन्हें बंटवारे के दौरान अपना घर और अपना शहर छोड़ना पड़ा था।

ऑडियो-वीडियो और लोगों की यादें

Partition Museum (पार्टिशन म्यूज़ियम) में सिर्फ़ तस्वीरें और पुरानी चीज़ें ही नहीं हैं, बल्कि बंटवारे के वक़्त लोगों की आंखों देखी और उनकी अपनी ज़ुबानी सुनाई गई कहानियों को भी ख़ास जगह दी गई है। यहां ख़ास ऑडियो और वीडियो स्टेशन बनाए गए हैं। इन पर बंटवारे का दर्द झेलने वाले बुज़ुर्गों के रिकॉर्ड किए गए इंटरव्यू सुने और देखे जा सकते हैं। इन लोगों ने अपने घर-बार छूटने, सफ़र की मुश्किलों और उस दौर की यादों के बारे में अपनी बातें साझा की हैं।

इसके अलावा, उस वक़्त के अख़बारों की कतरनें, सरकारी दस्तावेज़, आज़ादी और बंटवारे से जुड़े पुराने और दुर्लभ नक्शे भी यहां रखे गए हैं। ये सभी चीज़ें उस दौर को समझने और लोगों की आंखों देखी कहानी को करीब से महसूस करने में मदद करती हैं।

Pic Credit: TOI

‘उम्मीद का पेड़’ (Tree of Hope)

Partition Museum (पार्टिशन म्यूज़ियम) का आख़िरी हिस्सा लोगों के दिल में बंटवारे की उदासी के बीच एक नई उम्मीद जगाता है। यहां कंटीले तार (Barbed Wire) से एक ख़ास ‘Tree of Hope’ बनाया गया है। म्यूज़ियम में आने वाले लोग कागज़ से बने हरे पत्तों पर अमन, सुकून और भाईचारे के संदेश लिखकर इस पेड़ पर टांगते हैं। इन पत्तों पर लिखे संदेश बताते हैं कि लोग आज भी अमन और मोहब्बत को सबसे ज़्यादा अहमियत देते हैं। ये हिस्सा हमें एक ख़ूबसूरत पैग़ाम देता है कि नफ़रत और बंटवारे की दीवारों से कहीं बड़ी ताक़त मोहब्बत, अमन और मिल-जुलकर नई ज़िंदगी बनाने में है।

Pic Credit : TOI

तालीम और सांस्कृतिक अहमियत

Partition Museum (पार्टिशन म्यूज़ियम) सिर्फ़ एक घूमने-फिरने की जगह नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक अहम तालीमी जगह भी है। यहां आकर लोग अपने बड़ों के त्याग, संघर्ष और हौसले की कहानी को करीब से समझ सकते हैं। ये म्यूज़ियम हमें उस दौर की याद दिलाता है, जब लाखों लोगों ने अपना घर-बार खो दिया, लेकिन मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने दोबारा अपनी ज़िंदगी शुरू की। इसी वजह से अमृतसर आने वाले लोगों के लिए श्री हरमंदिर साहिब और जलियांवाला बाग़ के साथ Partition Museum (पार्टिशन म्यूज़ियम) देखना भी ख़ास अहमियत रखता है। यहां जाकर 1947 के बंटवारे और पंजाब की तारीख़ को समझने का एक अलग नज़रिया मिलता है।

स्टोरी: मनमीत कौर

इस लेख को पंजाबी में पढ़ें

ये भी पढ़ें: Kolkata के दो म्यूज़ियम में अनोखी एग्ज़िबिशन: ‘हड़प्पा से हर घर तिरंगा’ तक का इंकलाबी सफ़र

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