हैदराबाद (Hyderabad) के मोतीगल्ली की हलचल भरी गलियों में बसा चौमहल्ला पैलेस (Chowmahalla Palace) एक ऐसा ख़ज़ाना है, जो अपने आप में एक पूरी दास्तान समेटे हुए है। ये महल न सिर्फ़ निज़ामों की शान-ओ-शौकत की निशानी है, बल्कि उनकी तहज़ीब, फ़नकारी और हुकूमत की कहानी भी बयान करता है। इस ऐतिहासिक इमारत की तामीर लगभग 1751 ईस्वी में नवाब सलाबत जंग के शासनकाल में शुरू हुआ, जो आसफ़ जाह प्रथम के तीसरे बेटे थे। बाद में निज़ाम अली खान आसफ़ जाह सेकेंड ने अपनी राजधानी औरंगाबाद से हैदराबाद बदल कर दी और इस महल में कई नए महलों का निर्माण करवाया।

ख़िलवत मुबारक: महल की रूह
चौमहल्ला पैलेस (Chowmahalla Palace) का दिल खिलवत मुबारक (Khilwat Mubarak) है, जिसे सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान (The Seventh Nizam, Mir Osman Ali Khan) ने अगस्त 1912 में बनवाया और जनवरी 1916 में इसका उद्घाटन किया। इस इमारत की ख़ासियत ये है कि इसमें मुग़ल, कुतुबशाही, ईरानी और तुर्की स्थापत्य कला (Mughal, Qutb Shahi, Iranian, and Turkish architectural styles) का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। दरबार हॉल की ऊंची छतें और तुर्को-ईरानी शैली तो आपको हैरान कर देती हैं, वहीं बरामदों के खंभे कुतुबशाही दौर की याद दिलाते हैं।

इस हॉल के बीचों-बीच एक संगमरमर का तख़्त (Takht-i-Nishan) स्थित है, जो मुग़ल शैली के मसनद से ढका हुआ है। यहीं पर निज़ामों का ताजपोशी समारोह होता था और जनता के साथ आम दरबार भी लगता था। आज यहां ‘सिलसिला-ए-आसफ़िया’ नामक प्रदर्शनी लगती है, जो आसफ़ जाही वंश के निज़ामों की ज़िदगी और उनके योगदान पर सेंटर है।

चार महल: चौमहल्ला की चार रोशनियां
इस परिसर में चार शानदार महल हैं, जो एक-दूसरे के सामने बने हैं और बीच में एक ख़ूबसूरत तालाब है। ये महल हैं:-
1. आफ़ताब महल
यहां आपको ज़नाना (रानियों) की ज़िंदगी की झलक मिलेगी। इसमें शादी, बच्चों की पैदाइश, चाय पार्टियां और उपहारों के आदान-प्रदान के दृश्यों को मनकों (मैनेक्विन) के ज़रिए दिखाया गया है। दुल्हन को लाल-सुनहरी साड़ी में सजाया गया है और उसके दोस्तों ने थालियों में उपहार रखे हैं।
2. अफज़ल महल
ये पांचवें निज़ाम के दौर का शानदार ड्राइंग रूम है। यूरोपीय शैली में सजे इस हॉल में बेल्जियम के झूमर, शीशे की अलमारियां और बिलियर्ड टेबल देखने को मिलती है। बरामदे में दो पहलवानों की मूरत भी है।

3. मेहताब महल
यहां एक विशाल लाइब्रेरी है, जिसमें इतिहास, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान और साहित्य की दुर्लभ किताबें मौजूद हैं। पुराने अभिलेखों को बड़ी मेहनत से संरक्षित किया गया है।
4. तहनीयत महल
यह महल निज़ामों की शान-ओ-शौकत और तहज़ीब को दर्शाता है। यहां पर मुग़ल और यूरोपीय फर्नीचर, बेल्जियम के झूमर, चांदी के बर्तन और शाही खाने के लिए चांदी की कटलरी हैं। दीवान-ख़ाना में एक शानदार तख़्त है, जिसके पीछे माही-ओ-मरातिब (मछली और सितारे) का निशान है। जो मुग़लों द्वारा निज़ामों को दी गई सबसे बड़ी उपाधि थी।
हथियार और क़ुरआन गैलरी

यहां हथियारों का शानदार संग्रह है। शमशीर, तलवार, ढाल, बंदूकें, धनुष-तीर और बहुत कुछ। छठे निज़ाम की निजी तलवार अब्बासी पर सोने की नक्काशी है और उस पर ‘या अली मदद’ लिखा है।
क़ुरआन गैलरी में 1400 ईस्वी से लेकर 1905 ईस्वी तक के क़ुरआन रखे हैं। इनमें कूफ़ी, नस्तालीक़, नस्ख़, सुलुस वगैरह ख़त (शैलियां) देखने को मिलती हैं। कुछ क़ुरआन तो चांदी, चंदन, हाथी दांत और हाथ से पेंट की गई लकड़ी के रिहाल (स्टैंड) पर रखे हैं।

पुरानी गाड़ियां और निज़ामी ख़ज़ाना
सातवें निज़ाम के पास गाड़ियों का बड़ा काफ़िला था। रोल्स रॉयस सिल्वर घोस्ट (1912), फोर्ड टूरर (1934), ब्यूक, फिएट, नैपियर (1906), वोल्सले और पैकार्ड (1953) सभी पर शाही निशान बने हैं।

आख़िरी कलाम
चौमहल्ला पैलेस सिर्फ़ एक इमारत नहीं, बल्कि हैदराबाद की रूह है। यहां आकर ऐसा लगता है कि ज़माना थम गया है। निज़ामों की शाही, तहज़ीब और फ़नकारी का यह संगम हर इंसान को मोह लेता है। ये महल अतीत की उस शानदार दास्तान को बयान करता है, जो आज भी हमें अपनी तरफ़ खींचती है। अगर आप हैदराबाद जाएं, तो इस ऐतिहासिक ख़ज़ाने को देखना मत भूलें क्योंकि यह वह जगह है जहां इतिहास ज़िंदा है।
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