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प्रकृति के दो अनमोल रत्न: सुंदरवन और पश्चिमी घाट की कहानी

प्रकृति ने भारत को जो तोहफे दिए हैं, उनमें सुंदरवन और पश्चिमी घाट (Sundarbans And Western Ghats) का नाम बेहद अहम है। ये दोनों ही यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) हैं और अपनी अनोखी जैव विविधता (Biodiversity) के लिए मशहूर हैं। लेकिन इन्हें आज खतरों की घड़ी का सामना करना पड़ रहा है।

Image- pexels.com

सुंदरवन: जहां जंगल और समंदर मिलते हैं

सुंदरवन, गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा (The Sundarbans, the delta of the Ganges, Brahmaputra, and Meghna rivers) पर बसा है। 10 हज़ार वर्ग किलोमीटर में फैला ये दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव जंगल (The world’s largest mangrove forest) है। इसका नाम ‘सुंदरी’ पेड़ पर पड़ा है। यहां की सैर-गहरी नदियों, खाड़ियों और कीचड़ भरी ज़मीन का अपना ही नज़ारा है। ये जंगल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger) का घर है, जो अपने आप में एक दास्तान है। इसके अलावा गंगा और इरावदी डॉल्फ़िन (डॉल्फ़िन), खारे पानी के मगरमच्छ, और नदी कछुए जैसे दुर्लभ जीव-जंतु भी यहां पाए जाते हैं।

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पश्चिमी घाट: जैव विविधता का खज़ाना

1600 किलोमीटर लंबी ये पर्वत श्रृंखला, जिसे सह्याद्रि भी कहते हैं, भारत के पश्चिमी तट पर उत्तर से दक्षिण तक फैली (Stretching from north to south along India’s western coast) है। 7,400 से ज़्यादा पौधों की प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। यहां के जंगलों में शेर-पूंछ वाला मकाक (macaco), गंभीर रूप से संकटग्रस्त मालाबार सिवेट (Critically endangered Malabar civet), और कई उभयचर (Amphibian) जैसे ख़ास जीव पाए जाते हैं। यह इलाका दुनिया के आठ जैविक विविधता हॉटस्पॉट (The world’s eight biodiversity hotspots) में शामिल है।

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ख़तरनाक मोड़ पर दोनों विरासतें

सुंदरवन के सामने जलवायु परिवर्तन (Climate Change), बढ़ते समुद्र के स्तर, समुद्री तूफ़ान (Cyclone), और बढ़ती नमकीनता (Salinity) बड़ी चुनौती हैं। 2007 में चक्रवात सीडर ने 40 फीसदी जंगलों को नुकसान पहुंचाया और 2009 में आए चक्रवात ऐला ने क़रीब एक लाख लोगों को बर्बाद कर दिया। इंसानी दख़ल और कोयले से चलने वाले रामपाल पावर प्लांट ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

पश्चिमी घाट पर वनों की कटाई (Deforestation), खनन (Mining), बिजली परियोजनाएं, और शहरीकरण (Urbanization) का बड़ा असर है। ये सब आवासों को तोड़ रहे हैं और वन्य जीवन के लिए संकट पैदा कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश के पैटर्न में बदलाव ने चिंता और बढ़ा दी है।

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संरक्षण की ज़रूरत

सुंदरवन का 66 फीसदी हिस्सा बांग्लादेश में और बाकी भारत में है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ऐसे ही खतरे बढ़ते रहे तो ये ख़ूबसूरत जंगल अपनी जैव विविधता खोते रहेंगे। पश्चिमी घाट को भी अपनी अनमोल प्रजातियों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने पड़ेंगे।

इन दोनों ही धरोहरों को बचाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल, जलवायु परिवर्तन को रोकने के प्रयास, और जागरूकता ही इन रत्नों को बचा सकती है। वरना, आने वाली नस्लें इन्हें सिर्फ़ किताबों में पढ़ेंगी।

ये भी पढ़ें: Himalayan Diamond: 15 साल बाद खिलने वाला ‘केन्ज़ो फूल’, कुदरत का अज़ीब करिश्मा

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